अंशुमान तिवारी
देहरादून। करोड़ों भक्तों की श्रद्धा के केंद्र बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने में एक बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। देश में घोषित लॉकडाउन के कारण केदारनाथ मंदिर के मुख्य रावल महाराष्ट्र के नांदेड़ में फंस गए हैं। बाबा केदारनाथ को पहनाया जाने वाला सोने का मुकुट भी उन्हीं के पास है। लॉकडाउन के कारण टिहरी राजघराने के सदस्यों का पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है, जबकि परंपरा के मुताबिक कपाट खुलते समय उनका होना भी जरूरी है।
महाराष्ट्र से होते हैं केदारनाथ के रावल
केदारनाथ के रावल (गुरु) महाराष्ट्र व कर्नाटक और बद्रीनाथ के केरल से होते हैं। ये लोग वहीं से हर साल यात्रा के लिए यहां आते हैं। परंपरा के मुताबिक केदारनाथ के रावल खुद पूजा नहीं करते, लेकिन उन्हीं के निर्देश पर पुजारी मंदिर में पूजा करते हैं। वही बद्रीनाथ की परंपरा के मुताबिक रावल के अलावा कोई दूसरा बद्रीनाथ की मूर्ति नहीं छू सकता है।

पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के खिलाफ जंग को कामयाब बनाने के लिए देश में लॉकडाउन की समय सीमा तीन मई तक बढ़ा दी है। केदारनाथ मंदिर के मुख्य रावल महाराष्ट्र के नांदेड़ में फंसे हुए हैं और उनका यहां आना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कपाट खुलने से पहले केदारनाथ पहुंचने की अनुमति मांगी है।
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रावल ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
केदारनाथ मंदिर के रावल भीमाशंकर ने केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर मदद मांगी है। पंडित भीमाशंकर ने सड़क मार्ग से उत्तराखंड जाने की इजाजत मांगी है। हालांकि उन्हें अभी तक पीएमओ की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। उत्तराखंड सरकार उन्हें एयरलिफ्ट करने पर विचार कर रही है।

उनके साथ मंदिर ट्रस्ट के चार और लोग भी हैं। बाबा केदारनाथ को पहनाया जाने वाला सोने का मुकुट भी उन्हीं के पास है। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के समय टिहरी राजघराने के सदस्यों का मौजूद रहना भी अनिवार्य है, लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है।
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29 अप्रैल को खुलने वाले हैं मंदिर के कपाट
बाबा केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को सुबह छह बजे खुलने वाले हैं। उस समय भी देश में लॉकडाउन चलता रहेगा और मुख्य रावल का यहां पहुंचना मुश्किल लग रहा है। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट 26 अप्रैल को खुलने वाले हैं। कोरोना के प्रकोप के चलते सरकार ने इस बार चारधाम मंदिरों के ऑनलाइन दर्शन कराने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले पर स्थानीय लोगों और पुजारियों ने आपत्ति जताई है।

तेजी से चल रहा बर्फ साफ करने का काम
इस बीच केदारनाथ मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में जमी बर्फ को साफ करने का काम तेजी से चल रहा है। अब केवल एक किलोमीटर तक बर्फ को साफ करने का काम बाकी रह गया है। काम की गति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले 5 दिनों के भीतर इस एक किलोमीटर में जमी बर्फ की सफाई का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद मंदिर तक आने-जाने का रास्ता खुल जाएगा। रास्ते में हो रही बर्फबारी के कारण बर्फ की सफाई के काम में रुकावट आ रही है। बाकी काम तेजी से पूरा करने की कोशिशें की जा रही हैं।

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