यहां सामने आई स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, 2 साल से बंद पड़ी वेंटिलेटर मशीनें

जौनपुर:  पूरा देश इस समय वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहा है। अब तक इस महामारी से निपटने के लिए कोई दवा नहीं खोजी जा सकी है। इससे पीड़ित गंभीर मरीजों को जीवनदान देने के लिए वेंटिलेटर ही कुछ कारगार साबित हो रहा है। इसकी कमी से एक जिला ही नहीं पूरा प्रदेश परेशान है। यहां तक की सूबे के मुख्यमंत्री हर जिले में वेंटिलेटर की व्यवस्था करने के लिए जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर जिले के स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण जनपद जौनपुर में वाराणसी मार्ग पर स्थित सिरकोनी बाजार के पास बने ट्रामा सेंटर में चार वेंटिलेटर वर्षों से बेकार पड़े जंग खा रहे हैं।
2018 से खराब पड़े 4 वेंटीलेटर
जिले में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमओ राम जी पाण्डेय का कथन वेंटिलेटर के बाबत है कि जिले में यह सुविधा है ही नहीं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जिले में वाराणसी मार्ग पर स्थित सिरकोनी बाजार के पास हौज गांव में बना ट्रामा सेंटर क्या जनपद में नहीं है। यहां पर अल्ट्रासाउंड से लेकर अन्य अत्याधुनिक उपचार की मशीनें हैं। वह कब और किस काम आयेंगी। सूत्र की माने तो यहां पर जून 2018 में चार वेंटिलेटर मशीनें मंगा कर रखी गई हैं। जिसे आज तक इंस्टाल भी नहीं किया जा सका है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि संकट इस घड़ी में जब वेंटिलेटर की जरूरत है तो इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।
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आखिर किस लिए मशीन को रखा गया है इस बाबत सवाल करने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं हर जिम्मेदार ने मौन साध लिया है। हलांकि ट्रामा सेंटर में चार वेंटिलेटर मशीनों के विषय में ट्रामा सेंटर के प्रभारी डा. डी. के सिंह कहते हैं कि मुझे यहां आए हुए 8-9 महीने हुए हैं। मशीनें वर्षों से आ रखी हैं विभाग के उच्च अधिकारी आदेश देंगे तब उन्हें इंस्टाल करा दिया जाएगा। ट्रामा सेंटर प्रभारी ने टेक्नीशियन से पूरी जानकारी लेने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया।
सामने आई स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
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टेक्नीशियन डा. राम सहाय यादव ने बताया कि मशीन की रिसीविंग तो जून 2018 में ही हो गयी थी। लेकिन इंस्टाल न होने का कारण पता नहीं है। सी एम ओ डा. राम जी पाण्डे इसके बाद भी अपने बयान में वेंटिलेटर की अनुपलब्धता की बात करते हुए एक ही रट लगाए हैं कि जल्द वेंटिलेटर मशीनों की व्यवस्था हो जायेगी। इस तरह वेंटिलेटर की मशीन जिले में रहने के बाद भी कोरोना के उपचार में उसका उपयोग न करना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही मानी जा रही है। अब यहां सवाल इस बात का है कि क्या जिला प्रशासन इसे गम्भीरता से ले सकेगा या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के बयान को सच मानकर वह भी चुप्पी साध लेंगे।
कपिल देव मौर्या
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